Ajay Devgan's car stop
सेलिब्रिटी

रोटी कैसे पचती है?: अजय देवगन की कार रोकने वाला शख्स गिरफ्तार

बॉलीवुड के बहुत सारे सितारे आजकल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं , वह अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करते हुए नहीं थकते। उसी तरह सितारे अपनी राजनीतिक और सामाजिक राय सोशल मीडिया के द्वारा साझा करते हैं। पिछले कुछ समय से किसान आंदोलन के मुद्दे पर बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक के अधिकतर सितारों की प्रतिक्रिया सामने आई थी। लेकिन कुछ सितारे ऐसे भी थे जिन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से चुप्पी साधी हुई थी।

जिसमें बॉलीवुड के सुपरस्टार अजय देवगन का नाम भी शामिल है, जिनका हाल ही में किसान आंदोलन के समर्थक से सामना हुआ आदमी ने गाड़ी को रोकते हुए उनसे सवाल पूछा, आपको बताते हैं यह वाक्य मंगलवार की सुबह की है जब अजय अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी जा रहे थे तभी फिल्म सिटी के दरवाजे से थोड़ी दूर पहले ही अजय की गाड़ी को रोकते हुए एक सरदार ने अजय से किसान आंदोलन में चुप्पी तोड़ने की बात करने लगा, सड़क के बीचो बीच ऐसी हरकत करने की वजह से पुलिस ने उस शख्स को गिरफ्तार कर लिया।

अजय देवगन की कार रोकने वाला शख्स गिरफ्तार

दरअसल उस सरदार का अजय से यह कहना था कि दिल्ली में किसान इतने दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। आपने उनके समर्थन में कोई ट्वीट क्यों नहीं किया। उस शख्स ने करीब 15 मिनट तक अजय देवगन की गाड़ी को रोका था।

इसके तुरंत बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर अजय को फिल्म सिटी के अंदर तक छोड़ा। इस मामले के बाद ही दिंडोशी पुलिस ने उस सरदार को अपनी गिरफ्त में ले लिया इस घटना के बाद सरदार के एक दोस्त का कहना है कि “उनका दोस्त सिर्फ किसानों के हक के लिए बात करने गया यह कोई इतना बड़ा गुनाह तो नहीं है फिर पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों किया?”

आपको बता दें कि उस गाड़ी को रोकने वाले शख्स का नाम राजदीप सिंह है, एक मीडिया चैनल का कहना है कि राजदीप को अजय पर किसानों के खिलाफ होने का आरोप लगाते हुए सुना गया, राजदीप ने पंजाबी में अजय से कहा कि“ तुम लोग पंजाब के खिलाफ हो…शर्म करो तुम लोग को रोटी कैसे पचती है।” इसके बाद ही पुलिस वहां पहुंच गई और राजदीप को गिरफ्तार कर लिया। देखा जाए तो इस किसान आंदोलन मुद्दे पर बॉलीवुड के अधिकतर सितारों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर सामने आई थी। जहां कुछ फिल्मी सितारे इसका समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग इसे प्रोपेगेंडा बता रहे थे।